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Thursday, 3 August 2017

Anmol Vachan

*कश्तिया उन्ही की डूबती है ..*
*जिनके ईमान डगमगाते हैं !!*
*जिनके दिल में नेकी होती है ..*
*उनके आगे मंजिले भी सर झुकाती है !!*
*इंसान अपना वो चेहरा तो*
     *खूब सजाता है जिस पर*
     *लोगों की नज़र होती है*
    *मगर आत्मा को सजाने की*
    *कोशिश कोई नही करता*
*जिस पर परमात्मा की नजर होती है।*
   *सुप्रभात* 

दरवाज़ा हँस कर ही खोलो

鹿鹿
✍ *घर के अंदर जी भर के रो लो* *पर दरवाज़ा हँस कर ही खोलो....!!*
*क्योंकि लोगों को यदि पता लग गया कि तुम अंदर से टूट चुके हो तो वो तुम्हें लूट लेंगे*
 *इंसान* कभी *गलत* नहीं होता, उसका *वक़्त* गलत होता है मगर लोग इंसान को *गलत* कहेते हे जैसे के..............
*पतंग* कभी नहीं *कटती, कटता* तो *धागा* हे फिर भी लोग कहेते हे *पतंग* कटी"..!
  
       *鹿鹿*
*जय श्रीराधेकृष्ण*

Anmol Vachan

सदा उनके कर्जदार रहिये
      जो आपके लिए खुद का
            वक़्त नहीं देखता,,
     
और सदा ही उनके वफादार
       रहिये जो व्यस्त होने के
          बावजूद आपके लिए
              वक़्त निकालते है
               
   *GooD MorninG* 

जैन संदेश

Ⓜ *जैन संदेश* Ⓜ
*हर जैनी....*
फर्ज समझकर हर जैनी करें एक
काम
घर-घर घर में पहुंचाए अब एक
पैगाम
अपने वाहन के आगे *जय जिनेंद्र*
और पीछे *मिच्छामी दुक्कड़म* या
*उत्तम क्षमा* लिखें
जो हर राहगीर को दूर से भी दिखे
यदि आप मार्ग में किसी संकट में
फंस जायेंगे
तो तुम्हारी मदद को तुम्हारे पास
कई जैनी आऐगे।
धर्म का भी होगा प्रचार
मुश्किल की घड़ी में मिल जाएगा आपको
मददगार
जो दानवीर पुण्य कमाना चाहे
वो ऐसे दो स्टीकर बनवाये
जिसके दोनो कॉर्नर पर *जैन चिन्ह*
भी छपवाएं
● जैन चिन्ह *जय जिनेन्द*  जैन चिन्ह ●
● जैन चिन्ह *मिच्छामी दुक्कड़म* जैन चिन्ह ●
● जैन चिन्ह *उत्तम क्षमा* जैन चिन्ह ●
*अतिशीघ्र जगह जगह पहुंचाएं यह काम युद्धस्तर पर शुरू हो जाए*
*तो आओ हम इसे मिशन बनाए*।
          

तमीज


*बडो से बात करने का*
         *तरीका आपकी*
     *"तमीज" बताता है .*
      *और छोटों से बात*
      *करने का तरीका*
      *आपकी "परवरिश ".*
      *अपने शब्दों में ताकत*
      *डालें आवाज में नहीं*
     *क्यो कि बारिश से फूल*
      *उगते हैं, बाढ़ से नहीं...*

        *मै हर बार परखता हूँ कि*
         *"भगवान" है कि नही ?*
*पर उसने एक बार भी सबूत नही* *मांगा कि मैं "इंसान" हूँ या नही ?*

        *पाप नि:संदेह बुरा है..!!*
                *लेकिन..,*
*उससे भी बुरा है पुण्य का अहंकार....!!!*
*सुप्रभात*

Anmol Vachan

*राजा हरिश्चंद्र एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनकी ये एक खास बात थी कि जब वो दान देने के लिए हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी नज़रें नीचे झुका लेते थे।*
*ये बात सभी को अजीब लगती थी कि ये राजा कैसे दानवीर हैं। ये दान भी देते हैं और इन्हें शर्म भी आती है।*
*ये बात जब तुलसीदासजी तक पहुँची तो उन्होंने राजा को चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था* -
*ऐसी देनी देन जु*
*कित सीखे हो सेन।*
*ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ*
*त्यों त्यों नीचे नैन।।*
*इसका मतलब था कि राजा तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो? जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यूँ झुक जाते हैं?*
*राजा ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था कि जिसने भी सुना वो राजा का कायल हो गया।*
*इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया।*
*राजा ने जवाब में लिखा* -
*देनहार कोई और है*
*भेजत जो दिन रैन।*
*लोग भरम हम पर करैं*
*तासौं नीचे नैन।।*
*मतलब, देने वाला तो कोई और है वो मालिक है वो परमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है। परन्तु लोग ये समझते हैं कि मैं दे रहा हूँ राजा दे रहा है। ये सोच कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखें नीचे झुक जाती हैं।*


सुंदर हाथ

सुंदर हाथ
बहुत समय पहले की बात है। कुछ स्त्रियां एक नदी के तट पर बैठी थीं। वे सभी धनवान होने के साथ-साथ अत्यंत सुंदर भी थीं। वे नदी के शीतल एवं स्वच्छ जल में अपने हाथ - पैर धो रही थीं तथा पानी में अपनी परछाई देख- देखकर अपने सौंदर्य पर स्वयं ही मुग्ध हो रही थीं।
तभी उनमें से एक ने अपने हाथों की प्रशंसा करते हुए कहा, “देखो, मेरे हाथ कितने सुंदर हैं।” लेकिन दूसरी स्त्री ने दावा किया कि उसके हाथ ज्यादा खूबसूरत हैं। तीसरी स्त्री ने भी यही दावा दोहराया। उनमें इस पर बहस छिड़ गई। तभी एक वृद्धा लाठी टेकती हुई वहां से निकली। उसके कपड़े मैले- कुचैले थे। वह देखने से ही अत्यंत निर्धन लग रही थी। उन स्त्रियों ने उसे देखते ही कहा, “व्यर्थ की तकरार छोड़ो, इस बुढ़िया से पूछते हैं कि हममें से किसके हाथ सबसे अधिक सुंदर हैं।” उन्होंने बुढ़िया को पुकारा, “ए बुढ़िया, जरा इधर आकर ये तो बता कि हममें से किसके हाथ सबसे अधिक सुंदर हैं।” वृद्धा किसी तरह लाठी टेकती हुई उनके पास पहुंची और बोली, “मैं बहुत भूखी-प्यासी हूं। पहले मुझे कुछ खाने को दो। चैन पड़ने पर ही कुछ बता पाऊंगी।” वे सब हंस पड़ी और एक स्वर में बोलीं, “जा भाग, हमारे पास कोई खाना- वाना नहीं है। ये भला हमारी सुंदरता को क्या पहचानेगी।”
वहीँ थोड़ी ही दूरी पर एक मजदूर स्त्री बैठी थी। वह देखने में सामान्य लेकिन मेहनती और विनम्र थी। उसने वृद्धा को अपने पास बुलाकर प्रेम से बैठाया और अपनी पोटली खोलकर अपने खाने में से आधा खाना उसे दे दिया। फिर नदी से लाकर ठंडा पानी पिलाया। फिर उस मजदूर स्त्री ने उसके हाथ-पैर धोए और अपनी फटी धोती से पौंछकर साफ कर दिए। इससे वृद्धा को बड़ा आराम मिला। जाते समय वह वृद्धा उन सुंदर स्त्रियों के पास जाकर बोली, “सुंदर हाथ उन्हीं के होते हैं जो अच्छे कर्म करें तथा जरूरतमंदों की सेवा करें। अच्छे कार्यों से हाथों का सौंदर्य बढ़ता है, आभूषणों से नहीं।”

Anmol Vachan

*किसी ने क्या खूब लिखा है👍*

  *तू कर ले हिसाब, अपने हिसाब से,*

*लेकिन ऊपर वाला लेगा हिसाब, अपने हिसाब से..*
           🌹*सुप्रभात*🌹

AAJ KI ACHHI BAAT


 *AAJ KI ACHHI BAAT*
दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी।
दरिया -: खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ -: खुद अपना फल नहीं खाते।
फूल -: अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मधुमक्खी -: खुद अपना शहद नही खाती!
मालूम है क्यों..??
क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असल जिंदगी हैं।
     
मुझे अपनी जिंदगी में आज एक चीज की तमन्ना है
             *''मेरे मालिक''*
जिस जिस की आंखें ये पढ रही है
उसका दामन सदा ''खुशियों'' से भरा रखना।

Anmol vachan



*दरिया बनकर किसीको डुबाने से*
               *बेहतर है,*
*की जरिया बनकर किसीको बचाया*
                *जाए !!*
*मत जियो उसके लिए जो दुनिया के लिए खूबसूरत हो,*
*जियो उसके लिए जो तुम्हारी दुनिया खूबसूरत बनाये !!*

     *सुप्रभात*  

तोडना आसान जोड़ना मुश्किल

एक समय की बात है जब दो भाई, एक दुसरे के सामने ही पास वाले खेत में रहते थे. और 40 साल तक बिना किसी झगडे के वे मशीन बाटते थे, मजदुर खरीदते थे और जरुरत के अनुसार वस्तुए भी खरीदते थे. उनके बिच लम्बे सहयोग के बाद एक गलतफहमी हो गयी. और बहोत बड़ा झगडा भी हुआ, ग़लतफ़हमी से शुरू हुई ये अनबन कई हफ्तों तक चली और कुछ समय की शांति के बाद अब उनमे बहोत बदलाव आया और अब वो गलत फहमी कडवे शब्दों में बदल चुकी थी.
एक सुबह जॉन के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी. उसने दरवाज़ा खोला और पाया की बढई अपने सामान का बड़ा बक्सा लेकर खड़ा था. उसने बड़े भाई से कहा की वो कुछ दिनों से काम ढूंड रहा है. और नम्रता पूर्वक उसने पूछा की क्या उनके पास कोई छोटा-मोटा काम है जिसे वह कर सकता है? क्या वह उनकी मदत कर सकता है? ये सुनकर तुरंत जॉन (बड़े भाई) ने कहा, “हां, मेरे पास तुम्हारे लिए कोई काम है.”
उस खेत में नाले के उस पार देखो, वहा मेरा पडोसी है, पडोसी नहीं बल्कि मेरा छोटा भाई है. कुछ हफ्तों पहले हमारे बिच नाले पर एक घास का ढेर था, जो उसमे बुलडोज़र की मदत से हटा दिया (क्यू की छोटा भाई चाहता था की वो वहा पुल बनाये). ये सब उसने द्वेष और जलन की भावना से किया. तुम वो इमारती लकडियो का बाड़ा देखो? मै चाहता हु की तुम मेरे लिए भी एक बाड़ा बनाओ जो 8 फीट का हो, ताकि मै इस जगह को और उसके चहेरे को ना देख सकू. इस पर बढई कहता है की, “मुझे लगता है की मै इस परिस्थिती को समझ सकता हु. तुम मुझे कुछ किले दो और एक गड्डा खोदने वाला मनुष्य दो, तुम जो चाहते हो वो काम में निच्छित ही करूँगा.”
बड़े भाई को गाव में जाना था ताकि वो उस बढई की जरुरत का सामान लाने में मदत कर सके और फिर पूरा दिन आराम से खेत में काम कर सके. वो बढई पूरा दिन मुश्किल काम करता रहा जैसे लकडिया गिनना, खोदना,चुनना. शाम होने तक जब किसान (दोनों भाई) वापिस आ रहे थे तब तक उसका काम खत्म हो चूका था.
उन दोनों भाइयो की आखे खुली के खुली रह गयी क्यू की वहा कोई बाड़ा नहीं था. वहा पर सिर्फ और सिर्फ एक पुल था जो नाले के दोनों तरफ फैला हुआ था. उसने संतोषजनक काम किया था. और तब दोनों को अपनी-अपनी गलतियों का अहसास हो चूका था और उनके बिच की ग़लतफ़हमी भी दूर हो गयी थी.
बढ़ई ने बड़े भाई द्वारा दिए काम को छोड़कर दोनों भाइयो के बिच के रिश्ते का पुल बनाने का काम किया था, जो निच्छित ही प्रेरणास्पद था. उसके पडोसी, उसका छोटा भाई सभी उसी की तरफ आ रहे थे, दोनों भाई उस समय एक दुसरे को देखने के लिए बेचैन थे. और पुल के बिच में दोनों ने एक दुसरे को गले लगाया.
वे मुड़े और उन्होंने देखा की वो बढई कंधे पर अपना सामान लेकर जा रहा था. तभी बड़े भाई ने कहा, “कृपया रुको! कुछ दिन और रुको. मेरे पास तुम्हारे लिए और भी काम है. तब बढई ने कहा की उसे वहा रुकना और रहना निच्छित ही अच्छा लगेगा, लेकिन मुझे इस तरह के और भी बहोत से पुल बनाने है.
सीख – Moral
रिश्तो को तोडना बहोत आसान है लेकिन बनाये रखना बहोत मुश्किल. हमें जीवन में सभी के प्रेम भावना के साथ पेश आना चाहिये. रिश्तो में अनबन तो होते ही रहती है लेकिन हमें उस समय रिश्तो को तोड़ने की बजाये जोड़ने का काम करना चाहिये. और इसी तरह का प्रेरणास्पद काम बढ़ई ने किया था.

प्रेरणादायक अनमोल वचन

सर्वश्रेष्ठ प्रेरणादायक अनमोल वचन संग्रह –
1) दान देना ही आमदमी का एकमात्र व्दार है। – स्वामी रामतीर्थ
2) यदि किसी युवती के दोष जानना हों, तो उसकी सखियों में उसकी प्रशंसा करो। – बेंजामिन फ्रैंकलिन
3) पैसा आपका सेवक है। यदि आप उनका उपयोग जानते हैं; वह आपका स्वामी है। यदि आप उसका उपयोग नहीं जानते। – होरेस
4) दुसरे के दोष पर ध्यान देते समय हम स्वयं बहुत भले बन जाते हैं। परंतु जब हम अपने दोषों पर ध्यान देंगे। तो अपने आपको कुटिल और कामी पाएँगे। – महात्मा गांधी
5) जब तक तुममें दूसरों के दोष देखने की आदत मौजूद है। तब तक तुम्हारे लिए ईश्वर का साक्षात्कार करना अत्यन्त कठिन है। – रामतीर्थ
6) ज्ञानवान मित्र ही जीवन का सबसे बड़ा वरदान है। – युरिपिडिज
7) मुँह के सामने मीठी बातें करने और पीठ पीछे छुरी चलानेवाले मित्र को दुधमुँहे विषभरे घड़े की तरह छोड़ दो। – हितोपदेश


8) सच्चे मित्र को दोनों हाथों से पकड़कर रखो। – नाइजिरियन कहावत
9) उस काम को, जिसे तुम दुसरे व्यक्ति में बुरा समझते हो, स्वयं त्याग दो परंतु दूसरों पर दोष मत लगाओ। – स्वामी रामतीर्थ
10) जब जेब में पैसे होते हैं, तो तुम बुद्धिमान और सुंदर लगते हो तथा उस समय तुम अच्छा गाते भी हो। – स्वीडिश कहावत
11) धर्म तो मानव-समाज के लिए अफीम है। – कार्ल मार्स्क
12) जो चीज विकार को मिटा सके। राग-व्देष को कम कर सके। जिस चीज के उपयोग से मन सूली पर चढ़ते समय भी सत्य पर डटा रहे वही धर्म की शिक्षा है। – महात्मा गांधी
13) संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है। – प्लाट्स
14) जिसे धीरज है और जो मेहनत से नहीं घबराता, कामयाबी उसकी दासी है। – स्वामी दयानन्द सरस्वती
15) अपने जीवन का ध्येय बनाओ और इसके बाद अपनी सारी शारीरिक और मानसिक शक्ति, जो भगवान ने तुम्हें दी है, उसमें लगा दो। – कार्लाइल
16) महान ध्येय महान मस्तिष्क की जननी है। – इमन्स
17) चाहे धैर्य थकी घोड़ी हो, परंतु फिर भी वह धीरे-धीरे चलेगी अवश्य। – विलियम शेक्सपीयर
18) जो अपने लक्ष्य के प्रति पागल हो गया है, उसे ही प्रकाश का दर्शन होता है। जो थोड़ा इधर, थोड़ा उधर हाथ मारते हैं, वे कोई लक्ष्य पूर्ण नहीं कर पाते। वे कुछ क्षणों के लिए बड़ा जोश दिखाते है; किन्तु वह शीघ्र ठंडा हो जाता है। – स्वामी विवेकानंद
19) हमारा ध्येय सत्य होना चाहिए, न कि सुख। – सुकरात
20) मनुष्य के लिए निराशा के समान दूसरा पाप नहीं है। इसलिए मनुष्य को इस पापरुपिनी निराशा को समूल हटाकर आशावादी बनना चाहिए। – हितोपदेश
21) कष्ट और क्षति सहने के पश्चात् मनुष्य अधिक विनम्र और ज्ञानी हो जाता है। – फ्रैंकलिन
22) उड़ने की अपेक्षा जब हम झुकते हैं तब विवेक के ज्यादा नजदीक होते हैं।- वर्ड्सवर्थ
23) अभिमान की अपेक्षा नम्रता से अधिक लाभ होता है। – भगवान् गौतम बुद्ध
24) निराशा आशा के पीछे-पीछे चलती है। – एल. ई लैमडन
25) निराशा निर्बलता का चिह्न है। – स्वामी रामतीर्थ
26) जिस तरह पानी को कोई जल, कोई आब, कोई वाटर कहते हैं, उसी तरह एक ही सच्चिदानंद परमेश्वर को कोई अल्लाह, कोई हरि, कोई गॉड कहकर पुकारते हैं। – रामकृष्ण परमहंस
27) उस अल्लाह की स्तुति करनी चाहिए, जो समस्त संसार का चालक, दयालु, उदार पर अंतिम निर्णय के समय न्यायाधीश भी है। – कुरान
28) ईश्वर की कोई बौद्धिक परिभाषा नहीं दी जा सकती। हाँ, उसका आत्मा के सहारे अनुभव किया जा सकता है। – डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
29) पाप एक प्रकार का अँधेरा है, जो ज्ञान का प्रकाश होते ही मिट जाता है। – कालिदास
30) पुस्तकें मन के लिए साबुन का कार्य करती हैं। – महात्मा गांधी

शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा कैसे करे

शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा कैसे करे

Shanivar Ke Din Shanidev Ki Puja Kaise Kare : शनिदेव न्याय के देवता के रूप में जाने जाते है शनिदेव मनुष्य के कर्मो का फल उनके कर्मो के अनुसार देते है शनिदेव का दिन शनिवार का होता है इसी दिन हमारे हिन्दू धर्म में इनकी पूजा की जाती है और शनिदेव के भक्त उनके लिए व्रत भी रखते है और उन्हें खुश रखने के लिए कई उपाय भी करैत यही इसीलिए हम आपको बताते है की आप शनिदेव को किस तरह से प्रसन्न कर सकते है इसके लिए आपको क्या-2 उपाय करने होंगे जिसकी मदद से आप शनिदेव को प्रासां कर सकते है जाने इसकी पूरी जानकरी हमारे माध्यम से | शनिदेव का गुस्सा बहुत तेज़ होता है इसीलिए जब आप इनकी आराधना श्रद्धा भाव से नहीं करते तो यह आपको दंड देते है लेकिन जब यह आपकी भक्ति और श्रद्धा से खुश होते तब आपको वरदान भी देते है |



शनि पूजा मंत्र

शनि की पूजा करते समय आप उनके इस मंत्र का जाप करते है तो शनिदेव को प्रसन्नता मिलती है जब आप पीपल की परिक्रमा करके शनिदेव का ध्यान कर रहे है तब आप उनके इस मंत्र का जाप करे :
आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्।
देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।
विश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसम्भवाय विश्वपतये गोविन्दाय नमो नम:।
यह भी देखे : Kalratri Mantra
शनि पूजा मंत्र

शनिदेव की पूजा विधि

  1. सबसे पहले आप सुबह उठ कर नित्य काम करके स्नान करे |
  2. इस दिन शनिदेव की पूजा पुरे भक्ति भाव से करनी चाहिए और पूजा करते वक़्त अपने सभी पापो की क्षमा याचना मांगे |
  3. शनिदेव की पूजा के लिए आप उन पर काले तिल, सरसो का तेल, गुण व नीले रंग के लाजवंती पुष्प का उनके ऊपर अर्पण करे |
  4. शनिदेव महाराज की पूजा करने के पश्चात राहु और केट महराज की भी पूजा करनी चाहिए |
  5. अगर आप चाहते है तो इस दिन व्रत भी रख सकते है और व्रत शनिदेव को समर्पित करे |
  6. शनिदेव के नाम पर सरसो के तेल का दीपक भी जलाये |
  7. उसके बाद आप पीपल के पेड़ पर जल सींच कर उस पर सूत्र बांधे तथा पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा भी लगाए |
  8. अगर आप शनिवार के दिन व्रत रख रहे है तो उस दिन आप काले रंग के कपडे पहन सकते है क्योकि शनिदेव को काला रंग अधिक पसंद होता है और वह इससे प्रसन्न रहते है |
  9. शनिवार के दिन काले कुत्ते को तेल की चुपड़ी हुई रोटी भी खिलाये तथा कौए को गुलाब जामुन भी खिलाये |
  10. शनिदेव दान करने के लिए हमेशा ही तत्पर रहते है इसीलिए वह अपने भक्तो के दान करने से उनसे प्रसन्न रहते है इसीलिए शनिवार के दिन आप दान करे |

शनि काले और सूर्य के शत्रु क्यों है

शनि देव का जन्म
Shanidev Kale Aur Surya Ke Shatru Kyo Hai : भगवान शनिदेव को कौन नहीं जानता है वह भगवान् सूर्य देव के पुत्र है और शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा की जाती है | शनिदेव को फल कर्म देवता के रूप में भी जाना जाता है वह मनुष्य के कर्मो का फल देते है अगर किसी व्यक्ति के कर्म अच्छे नहीं है तो वह उनको कर्मो का फल दंडस्वरूप देते है और अगर कर्मो से प्रासां हो जाते है तो वह वरदान भी देते है | शनिदेव एक महान शक्तिशाली देवता के रूप में हमारे बीच में है जिनके भक्त इनकी सेवा के प्रति सजग रहते है और इन्हे खुश रखने के लिए कई तरह के उपाय भी अपनाते है लेकिन क्या आप जानते है की शनिदेव का रंग काला क्यों है ? और वह क्यों अपने पिता सूर्य देव के शत्रु है इसके पीछे भी एक अभूत बड़ा किस्सा है जिसकी जानकारी हम आपको देते है जाने हमारे माध्यम से |

शनि देव का जन्म

Shani Dev Ka Janm : सूर्य देव की पत्नी का नाम संज्ञा था और वह भगवान् शिव की बहुत बड़ी भक्त थी वह पूरे भक्ति भाव से उनकी पूजा करती थी लेकिन सूर्य देव के साथ अधिक समय रहने के पश्चात जब उन पर सूर्यदेव का तेज़ सहन नहीं हुआ तब उन्होंने वहां से जाने का निर्णय लिया और वह अपनी परछाई छाया को सूर्यदेव के पास छोड़ कर चली गयी | सूर्यदेव को छाया के ऊपर बिलकुल भी संदेह नहीं हुआ की वह उनकी पत्नी नहीं है और वह अपना जीवन व्यतीत करने लगे तभी छाया गर्भवती हो गयी और शनिदेव उनके गर्भ में थे उसी समय वह भगवान् शिव के ध्यान में मग्न रहने की वजह से अपना बिलकुल भी ख़याल नहीं रख पाती थी और शनिदेव को पोषण ठीक प्रकार से नहीं मिल पाया जिसकी वजह से उनका रंग गर्भ में ही काला हो गया |
यह भी देखे : Kalratri Mantra

ये है शनि और सूर्य के बैर की वजह | शनि और सूर्य की शत्रुता की कथा

जब शनिदेव का जन्म हुआ तब सूर्यदेव ने उन्हें अपनी गोद में लिए और देखा की यह इतना काला कैसे तब उन्होंने सारा इल्जाम अपनी पत्नी छाया पर लगा दिया मै भी गोरा और तुम भी गोरी तो इसका रंग कैसे काला हो गया यह मेरा बेटा नहीं हो सकता | इतना कह कर उन्होंने शनिदेव को त्याग दिया और जब शनिदेव ने यह अपनी माता का अपमान देख कर अपने पिता से शत्रु भाव रखने लग गए | उसके बाद उन्होंने भगवान् शिव की आराधना की और उन्हें प्रसन्न करके शक्तियां प्राप्त किया और न्यायप्रिय देवता के रुप में अपना स्थान प्राप्त किया।

कृष्ण जन्माष्टमी पर कैसे करें पूजन

कृष्ण जन्माष्टमी पर कैसे करें पूजन

Krishna Janmashtami Par Kaise Kare Pujan : श्री कृष्णा जन्माष्टमी का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व होता है क्योकि इसी दिन भगवान श्री कृष्णा का जन्म हुआ था इसी दिन भगवान कृष्णा के सभी भक्त उनके लिए व्रत का प्रावधान करते है और पूरे 12 घंटे यानि रात को 12 बजे से अगले दिन रात के 12 बजे तक बिना खाये पिए रहते है | हिन्दू धर्म में यह व्रत सबसे लम्बा व्रत माना जाता है तो हम आपको इस व्रत के बारे में जानकारी देते है की आप किस तरह से इस व्रत को करते है और क्या करने से कृष्णा जी को खुश कर सकेंगे | श्री कृष्णा जी का जन्म धरती पर असुरो के राज़ को ख़त्म करने के उद्देश्य से देवताओ द्वारा किया गया था वह खुद भगवान श्री कृष्णा के रूप थे इसीलिए हमारे हिन्दू धर्म में उन्हें भगवान माना जाता है |
यह भी देखे : Raksha Bandhan In Hindi

कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव

Krishna Janmashtmi Mahotsav : भगवान श्री कृष्णा भगवान विष्णु के आंठवे अवतार है जिनकी उत्पत्ति भगवान विष्णु द्वारा देवकी के गर्भ से धरती में हो रहे राक्षसों और दानवो के अंत के लिए किया गया था उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथी के दिन रोहिणी नक्षत्र में हुआ था यह उनका 5244 वां जन्मदिन है और इस साल यानि 2017 में यह दिन 14 और 15 अगस्त को मनाया जायेगा इस दिन दही हांड़ी, झांकी जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी कियस जाता है | इस दिन को गोकुल अष्टमी, श्री कृष्णा अष्टमी, श्रीकृष्ण जयंती के नामो से भी जाना जाता है |
यह भी देखे : Sheetala Ashtami
कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव

जन्माष्टमी व्रत विधि

Janmashtmi Vrat Vidhi : जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जी की की पूजा के लिए आप हमारे द्वारा बताये गए तरीको को आसानी से आजमा सकते है और इस दिन पूरे भक्तिभाव से उपवास रख कर अपने जीवन को सुखमय बना सकते है :
  1. उपवास करने से एक दिन पहले आप रात्रि को हल्का भोजन करे तथा रात्रि 12 बजे के बाद कुछ ना खाये |
  2. अगले दिन यानि उपवास वाले दिन आप व्रत रखने का प्रण ले तथा स्नान इत्यादि करके रोज़ के कामो से निवृत्त हो जाए |
  3. पश्चात सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें।
  4. घर में श्री कृष्णा के बाल चरित्र के प्रति उनके लिए जन्माष्टमी सजाये उसमे आप अनेक प्रकार के खिलौने को सजाये | और उसी जगह पर भगवान कृष्णा के बाल चरित्र की मूर्ति या फोटो के साथ स्तनपान कराती हुई देवकी जी का भी रखे |
  5. जहाँ आप जन्माष्टमी सजाये उस स्थान पर कृष्णा जी की मूर्ति को झूले के साथ रखे जिस पर वह झूले पर झूल रहे होंगे |
  6. उसके बाद रात्रि में विधिपूर्वक मुहूर्त होने पर शास्त्रों के अनुसार गोपाल जी की पूजा अर्चना करे तथा उनकी आरती भी उतारे |
  7. श्री कृष्णा जी को माखन और मिश्री बेहद पसंद है इसीलिए आप मिश्री और माखन की मदद से उन्हें भोग लगाए |
  8. जब आप उनकी पूजा अर्चना करे तथा तो माखन और मिश्री को प्रसाद के तौर पर बांटे | और च्नद्र को पानी से अर्घ देकर खाना खा ले |

Janmashtami Quotes In Hindi

Janmashtami Quotes In Hindi

जन्माष्टमी कोट्स इन हिंदी : जन्माष्टमी का पर्व साल में एक बार आता है और यह दिन भगवान विष्णु के आंठवे अवतार श्रीकृष्ण के जन्म के लिए मनाया जाता है उनका जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथी के दिन रोहिणी नक्षत्र में हुआ था | श्री कृष्णा जी एक बेहद प्रेरणादायक के रूप में अपना जीवन स्टार्ट किया इसीलिए हम आपको जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में कुछ बेहतर कोट्स बताते है जिन्हे आप जान सकते है | वैसे इससे पहले कई महापुरुषों जैसे विवेकानंद जीमुंशी प्रेमचंद कोट्स और गाँधी जी के बारे में पढ़ चुके है जिनके कोट्स द्वारा हमने बहुत कुछ सीखा तो अब आप कृष्ण जी द्वारा कहे गए कुछ ऐसे सुविचार जिनसे आप बहुत कुछ जान सकते है तो जानिए कुछ प्रेरणादायक और मोटिवेशनल सिद्ध होते है |


Radha Krishna Love Quotes

राधा कृष्णा लव कोट्स : राधा कृष्णा जी के ऊपर और उनके प्यार को दर्शाने वाले राधा कृष्ण के प्यार को यह कोट्स दर्शाते है आप इन्हे पढ़ सकते है :
गोकुल में जिसने किया निवास, उसने गोपियों के संग रचा, इतिहास! देवकी-यशोदा जिनकी मैया, ऐसे ही हमारे कृषण कन्हैया! शुभ जन्मआष्ट्मी!
आओ मिलकर सजाये नन्दलाल को, आओ मिलकर करें उनका गुणगान! जो सबको राह दिखाते हैं, और सबकी बिगड़ी बनाते हैं
जय श्री कृष्णा! मंगल, मूहं आपकी कृपा अपरम्पार, ऐसे श्री कृष्णा जी को, हम सबका नमस्कार!
आपको मिले खुशियों के सारे रंग, जीवन में भर जाये उमंग और तरंग, ले चलो, हमें भी अपने संग, हम नटखट है, लेकिन नहीं डालेंगे, आपके रंग में भंग! जय श्री कृष्णा!
आपको मिले खुशियों के सारे रंग, जीवन में भर जाये उमंग और तरंग, ले चलो, हमें भी अपने संग, हम नटखट है, लेकिन नहीं डालेंगे, आपके रंग में भंग!
राधा: आपने प्रेम मुझसे किया, पर शादी रुखमनी से क्यों की? कृष्ण: शादी में दो लोग चाहिए और हम तो एक हैं!
कृष्णा जिसका नाम है ,गोकुल जिसका धाम है ,ऐसे भगवन को हम सब का परनाम है
होता है प्यार क्या दुनिया को जिसने बताया, दिल के रिश्तों को जिसने प्रेम से सजाया, आज उस प्यार के देवता का जन्मदिन है
जन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई. कान्हा आपके घर प्रेम के साथ साथ खुशियों की सौगात लाएं। आप फलें फूलें और खूब तरक्की करें
कृषण की महिमा, कृषण का प्यार कृषण में श्रधा, कृषण से ही संसार मुबारक हो आप सबको जन्मआष्ट्मी का त्योहार!
Radha Krishna Love Quotes

Krishna Quotes On Truth

कृष्णा कोट्स ऑन ट्रुथ : भगवान कृष्णा जी सच्चाई का प्रतिक थे इसीलिए कुछ कोट्स उनके जन्मदिवस के मौके पर आप पढ़ सकते है जो की आपको सच्चाई का रास्ता दर्शाता है :
क्रिशन जी ने गोपिओं के साथ बहुत चक्कर चलाये और सफल भी रहे! लेकिन आपकी असफलता निरंतर चल रही है! भगवन श्री क्रिशन जी की कृपा आप पर भी हो और इस जन्माष्टमी को आप का भी चक्कर चल जाये!
कृषण की महिमा, कृषण का प्यार, कृषण में श्रधा, कृषण से ही संसार, मुबारक हो आप सबको जन्मआष्ट्मी का त्योहार!
आपको मिले खुशियों के सारे रंग जीवन में भर जाये उमंग और तरंग ले चलो, हमें भी अपने संग हम नटखट है, लेकिन नहीं डालेंगे, आपके रंग में भंग! जय श्री कृष्णा
देखो फिर जन्माष्टमी आई है, माखन की हांडी ने फिर मिठास बढ़ाई है, कान्हा की लीला है सबसे प्यारी दे आपको वो दुनिया की खुशियां सारी।
माखन चुराकर जिसने खाया बंसी बजाकर जिसने नचाया ख़ुशी मनाओ उसके जन्म की जिसने दुनिया को प्रेम सिखाया
वो मोर मुकुट, वो है नंद लाला, वो मुरली मनोहर, बृज का ग्वाला, वो माखन चोर, वो बंसी वाला, खुशियां मनायें उसके जन्म की, जो है इस जग का रखवाला
चन्दन की खुशबु को रेशम का हार; सावन की सुगंध और बारिश की फुहार;राधा की उम्मीद को कन्हैया का प्यार;मुबारक हो आपको जन्मआष्ट्मी का त्योंहार!
जन्माष्टमी का त्योहार एक राधा और एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा अब श्याम पर है, सारा भार किसकी प्रीत करे स्वीकार
माखन चोर नन्द किशोर,बांधी जिसने प्रीत की डोर. हरे कृष्ण हरे मुरारी,पुजती जिन्हें दुनिया सारी, आओ उनके गुण गाएं सब मिल के जन्माष्टमी मनाये
कृष्ण के क़दमों पे कदम बढ़ाते चलो अब मुरली नहीं तो सीटी बजाते चलो राधा तो घर वाले दिलायेंगे ही मगर तब तक गोपियाँ पटाते चलो

Radhe Krishna Status In Hindi

राधे कृष्णा स्टेटस इन हिंदी : नीचे दिए गए कुछ स्टेटस राधे कृष्ण के प्यार और उनके साथ बीते हुए जीवन के बारे में बताते है आप इन्हे पढ़ कर अपने दोस्तों से शेयर भी कर सकते है :
मुरली मनोहर, बृज के धरोहर वो नंद लाल गोपाला हैं, बंसी की धुन पे सब जग के दुःख हरने वाले नंद लाल गोपाला हैं, आया है शुभ दिन देखो जन्माष्टमी का फैला चारों ओर उजाला है, सब के मन में बसने वाले उस बंसी वाले का देखो अंदाज़ ही निराला है
सोचा किसी अपने से बात करें अपने किसी ख़ास को याद करें किया जो फैसला जन्माष्टमी की शुभकामना देने का दिल ने कहा क्यों न आपसे शुरुआत करें
माखन चुराकर जिसने खाया, बंसी बजाकर जिसने नचाया, ख़ुशी मनाओ उसके जन्म की, जिसने दुनिया को प्रेम सिखाया
माखन चुरा कर जिसने खाया,बंसी बजाकर जिसने नचाया, ख़ुशी मनाओ उसके जन्म की. जिसने दुनिया को प्रेम करना सिखाया, जन्माष्टमी की शुभकामनाये!
मुरली मनोहर कृष्ण कन्हैया यमुना तट पर विराजे है, मोर मुकुट पर, कानों में कुंडल कर में मुरलिया साजे है
माखन का कटोरा मिश्री का थाल, मिटटी की खुशबु बारिश की फुहार, राधा की उम्मीदें कन्हैया का प्यार, मुबारक हो जन्माष्टमी का त्यौहार
गोकुल में जो करे निवास, गोपियों संग जो रचाये रास, देवकी यशोदा जिनकी मईया, ऐसे हमारे कृष्ण कनहैया। कृष्णा जन्माष्टमी की शुभ कामनायें
राधे कृष्ण इसे धीरे-धीरे बोलें रा. . .ह. . .दे. . . कृष्ण जिसका मतलब है, हे ईश्वर! मुझे वो दिशा दिखा जिससे मैं सही राह पर चल सकूं।
पलकें झुकें, और नमन हो जाए! मस्तक झुके, और वंदन हो जाए! ऐसी नज़र, कंहाँ से लाऊँ, मेरे कन्हैया! कि आप को याद करूँ, और आपके, दर्शन हो जाए!
नंद के घर आनंद ही आनंद भयो जो नंद के घर गोपाल आयो, जय हो मुरलीधर गोपाल की जय हो कन्हैया लाल की। कृष्ण जन्माष्टमी की शुभ कामनायें
माखन चोर नन्द किशोर, बांधी जिसने प्रीत की डोर,हरे कृष्ण हरे मुरारी,पुजती जिन्हें दुनिया सारी, आओ उनके गुण गाएं सब मिल के जन्माष्टमी मनाये
माखन चुरा कर जिसने खाया,बंसी बजाकर जिसने नचाया,ख़ुशी मनाओ उसके जन्म की. जिसने दुनिया को प्रेम करना सिखाया
चन्दन की खुशबु को रेशम का हार, सावन की सुगंध और बारिश की फुहार, राधा की उम्मीद को कन्हैया का प्यार, मुबारक हो आपको जन्मआष्ट्मी का त्योंहार
बाल रूप है सब को भाता माखन चोर वो कहलाया है, आला आला गोविंदा आला बाल ग्वालों ने शोर मचाया है, झूम उठे हैं सब ख़ुशी में, देखो मुरली वाला आया है

Wednesday, 2 August 2017

चाणक्य के 15 अनमोल विचार

आचार्य चाणक्य नीति
Chanakya Ke 15 Anmol Vichar : चाणक्य एक बहुत ही चालक और ज्ञानी व्यक्ति था जिनके अनमोल विचार हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है | चाणक्य जी हमारे उन महापुरुषों में से एक है जिनके द्वारा कहा गया कथन सत्य साबित होता है और हमारे लिए प्रेरणादायी सिद्ध होता है | वैसे इससे पहले कई महापुरुषों जैसे विवेकानंद जी, मुंशी प्रेमचंद कोट्स और गाँधी जी के बारे में पढ़ चुके है जिनके कोट्स द्वारा हमने बहुत कुछ सीखा तो अब आप चाणक्य जी द्वारा कहे गए कुछ ऐसे सुविचार जिनसे आप बहुत कुछ जान सकते है तो जानिए कुछ प्रेरणादायक और मोटिवेशनल सिद्ध होते है |
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आचार्य चाणक्य नीति

कोई कार्य शुरू करने से पहले खुद से तीन प्रश्न कीजिये– मैं यह क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल हो जाऊंगा? जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जाएं, तभी आप आगे बढ़िये।
फूलों की सुगंध केवल हवा की दिशा में फैलती है लेकिन एक इंसान की अच्छाई चारों दिशाओं में फैलती है।
हमें अतीत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, न ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए। विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में ही जीते हैं।
मुर्ख लोगो से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से हम अपना ही समय नष्ट करते है.
भगवान मूर्तियो मे नही बसता बल्कि आपकी अनुभूति ही आपका ईश्वर है और आत्मा आपका मंदिर
चाणक्य के 15 अनमोल विचार

चाणक्य कोट्स व लव

कोई भी व्यक्ति ऊँचे स्थान पर बैठकर ऊँचा नहीं हो जाता बल्कि हमेशा अपने गुणों से ऊँचा होता है
ढेकुली नीचे सिर झुकाकर ही कुँए से जल निकालती है। अर्थात कपटी या पापी व्यक्ति सदैव मधुर वचन बोलकर अपना काम निकालते है
पडोसी राज्यों से सन्धियां तथा पारस्परिक व्यवहार का आदान-प्रदान और संबंध विच्छेद आदि का निर्वाह मंत्रिमंडल करता है
रत्न कभी खंडित नहीं होता। अर्थात विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।
हमें अतीत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, न ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए। विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में ही जीते हैं
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आर्य चाणक्य विचार

एक सबसे अच्छी बात जो शेर से सीखी जा सकती है, वह यह है कि व्यक्ति जो कुछ भी करना चाहता है उसे पूरे दिल से एक जोरदार प्रयास के साथ करे
कभी भी उनसे दोस्ती मत कीजिये जो आपसे कम या अधिक प्रसिद्ध हों, ऐसी दोस्ती आपको कभी भी ख़ुशी नहीं दे सकती
जब आप किसी काम की शुरुआत करें, तो असफलता से न डरें और उस काम को न छोड़ें। जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं वह सबसे प्रसन्न होते हैं
सारस की तरह एक बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए और अपने उद्देश्य को स्थान की जानकारी, समय और योग्यता के अनुसार प्राप्त करना चाहिए।
एक व्यक्ति अकेला ही पैदा होता है और अकेले ही मरता जाता है; और वह अकेले ही अपने कर्मों के अच्छे और बुरे परिणामों का एहसास करता है; और वह नरक या सर्वोच्च डेरे में अकेले ही चला जाता है.
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